फुटबॉल की दुनिया के सबसे बड़े महाकुंभ, FIFA वर्ल्ड कप 2026 के शुरू होने से पहले खेल की नियामक संस्था IFAB और FIFA ने ऐतिहासिक बदलावों को मंजूरी दे दी है। इस बार वर्ल्ड कप न केवल टीमों की संख्या (48 टीमें) के लिहाज से बड़ा होगा, बल्कि मैदान पर अनुशासन और पारदर्शिता के मामले में भी बिल्कुल अलग नजर आएगा।
फीफा ने एक तरफ तल्ख व्यवहार पर रेड कार्ड का प्रावधान किया है, तो दूसरी तरफ बढ़ते मैचों को देखते हुए येलो कार्ड के नियमों में बड़ी ढील दी है।
1. अनुशासन पर ‘सिक्सर’: मुंह ढका तो मिलेगा रेड कार्ड
मैदान पर खिलाड़ियों के बीच होने वाली कहासुनी अब छिपी नहीं रहेगी। जियानी इन्फेंटिनो की अगुवाई में फीफा ने दो सख्त नियम लागू किए हैं:
मुंह छिपाकर बात करना मना: यदि कोई खिलाड़ी विपक्षी खिलाड़ी से बहस करते समय अपना मुंह हाथ या जर्सी से ढकता है, तो रेफरी उसे सीधा रेड कार्ड दिखा सकता है। यह फैसला खिलाड़ियों द्वारा दी जाने वाली नस्लीय या अपमानजनक टिप्पणियों को रोकने के लिए लिया गया है।
मैदान छोड़ने पर सजा: अगर कोई खिलाड़ी या टीम अधिकारी रेफरी के फैसले के विरोध में ‘वॉक-आउट’ करता है या मैदान छोड़कर जाता है, तो उसे रेड कार्ड दिया जाएगा और टीम को मैच गंवाना पड़ सकता है।
2. स्टार खिलाड़ियों को बड़ी राहत: ‘डबल एमनेस्टी’ पॉलिसी
चूंकि इस बार टूर्नामेंट में ‘Round of 32’ के रूप में एक अतिरिक्त नॉकआउट दौर जुड़ा है, इसलिए खिलाड़ियों को सस्पेंशन से बचाने के लिए दो बार कार्ड्स का रिकॉर्ड साफ किया जाएगा:
पहला रिसेट: ग्रुप स्टेज खत्म होते ही सभी सिंगल येलो कार्ड मिटा दिए जाएंगे।
दूसरा रिसेट: क्वार्टर फाइनल के बाद भी कार्ड्स का रिकॉर्ड साफ होगा, ताकि सेमीफाइनल में पीला कार्ड मिलने पर भी खिलाड़ी फाइनल मैच खेल सके।
3. ‘टाइम-वेस्टिंग’ पर सर्जिकल स्ट्राइक
मैच के दौरान समय की बर्बादी रोकने के लिए फीफा ने ‘स्टॉपवॉच’ जैसा कड़ा रुख अपनाया है:
10 सेकंड एग्जिट रूल: सब्स्टीट्यूशन (खिलाड़ी बदलने) के दौरान बाहर जाने वाले खिलाड़ी को 10 सेकंड के भीतर मैदान छोड़ना होगा। अगर वह ऐसा नहीं करता, तो उसकी टीम को 1 मिनट तक 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ेगा।
विजुअल काउंटडाउन: थ्रो-इन और गोल-किक के लिए अब मैदान पर डिजिटल काउंटडाउन चलेगा, जिससे खेल की रफ्तार बनी रहे।
