14 महीने competition से दूर रहे Avinash Sable ने ACL surgery, दोबारा लगी चोट, बढ़े वजन और career खत्म होने के डर को पीछे छोड़कर वापसी की है। अब Aichi-Nagoya Asian Games में उनका लक्ष्य सिर्फ लौटना नहीं, अपना 3000m steeplechase title बचाना है।
एक steeplechase runner के सामने hurdle आए तो उसका काम है उसे पार करना। लेकिन भारत के Avinash Sable के लिए एक समय ऐसा भी आया, जब सामने hurdle देखते ही उन्हें डर लगने लगा था।
वही Sable जिन्होंने Hangzhou Asian Games में 3000m steeplechase का gold medal जीता। वही athlete जिन्होंने भारत के लिए national record बनाया। और वही Sable एक चोट के बाद इस हद तक confidence खो बैठे कि उन्हें लगा कि शायद उनका career खत्म हो गया है।
अब 14 महीने के लंबे इंतजार के बाद Sable फिर track पर हैं। और सामने है Aichi-Nagoya Asian Games 2026, जहां उन्हें अपना खिताब बचाना है।
एक गिरावट जिसने सब बदल दिया
Sable की मुश्किलों की शुरुआत 2025 Monaco Diamond League में हुई।
वह personal best के इरादे से उतरे थे, लेकिन water jump के पास एक अन्य runner के stumble करने के बाद Sable बुरी तरह गिरे। उनके दाहिने घुटने में गंभीर चोट लगी और बाद में ACL surgery करानी पड़ी।
इसके बाद शुरू हुआ rehabilitation का लंबा दौर। एक elite athlete, जो लगातार दौड़ने और barriers पार करने का आदी था, उसके लिए सामान्य workout भी मुश्किल हो गया। लेकिन समस्या सिर्फ शरीर की नहीं थी।
जब hurdles ही डराने लगे
चोट ने Sable के confidence को भी बुरी तरह प्रभावित किया। उन्होंने Bengaluru स्थित Sports Authority of India centre में reporters से बातचीत में बताया कि hurdles को देखकर उन्हें दोबारा गंभीर चोट लगने का डर सताता था। उन्हें भरोसा नहीं था कि वह पहले की तरह लौट पाएंगे।
एक समय स्थिति ऐसी हो गई कि उनके मन में career खत्म होने का ख्याल तक आने लगा। Steeplechase में जिस obstacle को पार करना Sable की सबसे बड़ी ताकत थी, चोट के बाद वही obstacle उनके लिए मानसिक बाधा बन गया था।
वजन बढ़ा, फिर दूसरी चोट
Sable ने नवंबर में दोबारा running शुरू की, लेकिन comeback सीधा नहीं रहा।
लंबे break के दौरान उनका वजन करीब 4 से 5 किलो बढ़ गया था। Recovery के कारण वह diet बहुत कम भी नहीं कर सकते थे।
इसके बाद मई में shin problem ने उन्हें फिर training रोकने पर मजबूर कर दिया। Sable का मानना है कि अतिरिक्त वजन के साथ खुद को ज्यादा push करने की कोशिश ने दूसरी injury में भूमिका निभाई हो सकती है।
मतलब एक चोट से लौटने की कोशिश में उन्हें एक और setback मिला। और इसी दौरान Commonwealth Games भी निकल गए। लेकिन Asian Games नहीं छोड़ना चाहते थे, यहीं से कहानी फिर बदलती है।
Sable ने कहा कि Commonwealth Games miss करने के बाद वह Asian Games भी नहीं गंवाना चाहते थे। Bengaluru में coaches और साथी athletes ने उनके confidence को वापस लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। धीरे-धीरे training शुरू हुई। फिर अगस्त में उन्होंने Belgium में 5000m race के जरिए competition में वापसी की। और इसके बाद New Delhi में आखिरकार उस event में लौटे जिससे उनका नाम जुड़ा है- 3000m steeplechase।
8:32.39 – समय से ज्यादा महत्वपूर्ण थी वापसी
Delhi में Sable ने 3000m steeplechase 8 मिनट 32.39 सेकंड में जीत लिया। यह उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं था। उनका Indian national record 8:09.91 है और Hangzhou Asian Games में उन्होंने 8:19.50 के Games record के साथ gold जीता था।
लेकिन Delhi की race को सिर्फ stopwatch से देखना शायद पूरी कहानी नहीं बताएगा। वह दूसरे स्थान पर रहे runner से लगभग 18 सेकंड आगे रहे और, सबसे महत्वपूर्ण, 14 महीने बाद फिर hurdles पार करते हुए race पूरी की। जिस hurdle से कुछ महीने पहले डर लग रहा था, वही अब फिर उनकी race का हिस्सा था।
Hangzhou में Gold और Silver, अब फिर दो events की उम्मीद
Sable ने पिछले Hangzhou Asian Games में शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने 3000m steeplechase में gold और 5000m में silver जीता था। इसके बाद Paris Olympics में steeplechase final तक पहुंचे और 11वें स्थान पर रहे। 2025 Asian Championships में भी उन्होंने gold जीता।
अब Aichi-Nagoya में उनका 3000m steeplechase berth तय है। Reports के मुताबिक उनकी 5000m entry भी स्वीकार की गई है, जिससे उनके फिर दोनों events में उतरने का रास्ता खुल गया है।
इस बार चुनौती अलग है
तीन साल पहले Sable Asian Games में medal जीतने पहुंचे थे। इस बार वह वहां उस शरीर और confidence को दोबारा बनाने के बाद पहुंच रहे हैं, जिस पर कभी उन्हें खुद भरोसा नहीं रहा था। उनका लक्ष्य भी साफ हैच पिछले Asian Games से बेहतर करना। और शायद इसीलिए Nagoya में Sable की race सिर्फ stopwatch और medal की कहानी नहीं होगी।
यह उस runner की वापसी होगी, जिसे एक समय hurdles से डर लगने लगा था और अब वही hurdles पार करके अपना Asian Games gold बचाने जा रहा है।
