आमतौर पर Asian Games जैसी प्रतियोगिता में सातवें स्थान पर रहने वाले खिलाड़ी की चर्चा शायद ही headline बने। लेकिन Afghanistan की Fariba Hashimi के लिए यह सातवां स्थान किसी medal से कम मायने नहीं रखता। क्योंकि एक समय ऐसा था जब उन्हें सिर्फ साइकिल चलाने और training करने के लिए पुरुषों जैसा भेष बनाना पड़ता था। रास्ते में उन पर पत्थर और बोतलें फेंकी जाती थीं। फिर हालात ऐसे बदले कि उन्हें अपना देश तक छोड़ना पड़ा। और अब वही Fariba Aichi-Nagoya Asian Games 2026 में Asia की elite cyclists के बीच Women’s Individual Time Trial में सातवें स्थान पर रही हैं।
Asian Games में Medal नहीं, लेकिन बड़ी उपलब्धि
23 वर्षीय Fariba ने रविवार को Shinshiro Cycling Road Course पर हुई Women’s Individual Time Trial में सातवां स्थान हासिल किया। 24.2 km की race में Kazakhstan की Rinata Sultanova ने 36:23.72 में Gold जीता। China की Zhang Hao Silver और South Korea की Shin Ji-eun Bronze medallist रहीं। Fariba विजेता से लगभग 2 मिनट 3 सेकंड पीछे सातवें स्थान पर रहीं। लेकिन Fariba की कहानी stopwatch के आंकड़ों से कहीं बड़ी है।
लड़की होकर Cycle चलाना भी आसान नहीं था
Fariba Afghanistan के Faryab province में पली-बढ़ीं। वहीं उन्होंने अपनी बहन Yulduz Hashimi के साथ cycling शुरू की। लेकिन एक लड़की का खुलेआम cycle चलाना वहां उनके लिए लगातार विरोध और खतरे का कारण बना। Reuters को Fariba ने बताया कि training के लिए उन्हें खुद को छिपाना पड़ता था। वह पुरुषों जैसे कपड़े पहनतीं और चेहरे को कई masks से ढकतीं, ताकि लोग पहचान न सकें कि cycle चला रहा व्यक्ति वास्तव में एक लड़की है। फिर भी परेशानी खत्म नहीं हुई। रास्ते में उन्हें लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। उन पर पत्थर और बोतलें तक फेंकी गईं। एक athlete के लिए चुनौती सिर्फ तेज cycle चलाने की नहीं थी। पहली चुनौती थी- cycle चला पाना।
2021 में Afghanistan छोड़ना पड़ा
2021 में Taliban के दोबारा सत्ता में आने के बाद Fariba और उनकी बहन की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। दोनों को Afghanistan छोड़ना पड़ा। Former cycling world champion Alessandra Cappellotto की मदद से Fariba Italy पहुंचीं और वहीं से उन्होंने अपने cycling career को आगे बढ़ाया। अपना देश पीछे छूट चुका था, लेकिन cycling नहीं छूटी। और कुछ ही वर्षों में Fariba दुनिया के सबसे बड़े sporting stage तक पहुंच गईं।
Paris Olympics तक पहुंचीं Fariba
Fariba और उनकी बहन Yulduz ने cycling जारी रखी और Fariba ने Paris Olympics में भी हिस्सा लिया। यानी जिस लड़की को कभी अपने ही इलाके में cycle चलाने के लिए अपनी पहचान छिपानी पड़ती थी, वह Olympic athlete बन चुकी थी। अब Asian Games में भी Fariba ने Asia की शीर्ष cyclists के बीच खुद को खड़ा किया है।
Afghanistan की महिलाओं के लिए संदेश
Fariba के लिए Asian Games में सातवां स्थान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह अपनी performance को सिर्फ व्यक्तिगत sporting achievement के रूप में नहीं देखतीं। वह चाहती हैं कि Afghanistan की युवा लड़कियां उनकी journey देखें और यह महसूस करें कि उनके लिए संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। Reuters से बातचीत में उन्होंने अपने देश की महिलाओं तक यह संदेश पहुंचाने की इच्छा जताई कि वे अब भी मौजूद हैं और अपने सपनों के लिए संघर्ष कर रही हैं। Fariba भविष्य में Afghanistan लौटने की उम्मीद भी रखती हैं और चाहती हैं कि वहां अगली पीढ़ी की लड़कियों के लिए परिस्थितियां बदलें।
इसलिए सातवां स्थान भी खास है
Asian Games की medal table में Fariba Hashimi का नाम शायद आज दिखाई नहीं देगा। Gold Kazakhstan के पास गया। Silver China को मिला। Bronze South Korea ने जीता। लेकिन सातवें स्थान पर Afghanistan की Fariba Hashimi की कहानी सिर्फ race result की कहानी नहीं है। पुरुषों का भेष बनाकर training करने से लेकर रास्ते में पत्थर और बोतलें झेलने तक। अपना देश छोड़ने से लेकर Olympics तक पहुंचने तक। और अब Asian Games में Asia की elite cyclists के बीच सातवें स्थान तक। कभी उन्हें यह छिपाना पड़ता था कि cycle चलाने वाला व्यक्ति एक लड़की है। आज पूरी दुनिया जानती है कि उस cyclist का नाम Fariba Hashimi है।
