श्रीलंका A के खिलाफ डाम्बुला में खेले गए ट्राई-सीरीज फाइनल में वैभव ने 29 गेंदों पर 94 रनों की तूफानी पारी खेली और भारत A को 66 रन से खिताबी जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी इस पारी में सबसे बड़ा आकर्षण 11 गेंदों में पूरी हुई फिफ्टी रही, जो कि List A क्रिकेट इतिहास की सबसे तेज हाफ सेंचुरी रही।
लेकिन इस ऐतिहासिक पारी के पीछे सिर्फ ताकत और टाइमिंग की कहानी नहीं थी। इसके पीछे एक मुश्किल दौर, बढ़ता दबाव और कोच की एक छोटी-सी सलाह भी थी, जिसने वैभव का आत्मविश्वास फिर से जगा दिया।
टूर्नामेंट के शुरुआती मुकाबलों में वैभव अपनी क्षमता के मुताबिक बड़ी पारी नहीं खेल पा रहे थे। उन्होंने पहले चार मैचों में 14, 44, 21 और 38 रन बनाए। स्ट्राइक रेट जरूर आक्रामक था, लेकिन वह बड़ा स्कोर नहीं आ रहा था, जिसकी उम्मीद इस युवा बल्लेबाज से की जा रही थी। धीमी और स्पिन की मददगार श्रीलंकाई पिचों पर 50 ओवर के फॉर्मेट में खुद को ढालना उनके लिए चुनौती बन रहा था।
फाइनल से पहले भारत A के कोच ऋषिकेश कानिटकर ने वैभव से बात की। सलाह बहुत सरल थी- “तू अपना नेचुरल गेम खेल, ज्यादा सोच मत।”
वैभव के मुताबिक, यही बात उनके लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई। उन्होंने खुद को बैक किया, ओवरथिंकिंग छोड़ी और फाइनल में वही बल्लेबाजी दिखाई, जिसके लिए वह पहचाने जाते हैं।
श्रीलंका A के खिलाफ वैभव शुरुआत से ही अलग लय में दिखे। उन्होंने गेंदबाजों को सेट होने का मौका नहीं दिया और पावर-हिटिंग का ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने मैच का रुख भारत A की ओर मोड़ दिया। 94 रन की पारी में उन्होंने गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा और भारत A को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई। भारत A ने बाद में श्रीलंका A को 311 रन पर रोककर 66 रन से फाइनल जीत लिया।
यह पारी इसलिए भी अहम थी क्योंकि वैभव पिछले मैच में श्रीलंका A खिलाड़ियों के साथ मैदान पर हुई तनातनी के बाद चर्चा में थे। उनके स्वभाव, परिपक्वता और दबाव झेलने की क्षमता पर सवाल उठने लगे थे। लेकिन फाइनल में उन्होंने बल्ले से जवाब दिया और वह भी रिकॉर्ड तोड़ अंदाज में।
आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के बाद वैभव से उम्मीदें बहुत बढ़ चुकी हैं। टी20 क्रिकेट में उनका स्वाभाविक खेल आक्रामक है, लेकिन 50 ओवर के फॉर्मेट में हर गेंद को मारना आसान नहीं होता। यहां बल्लेबाज को धैर्य, शॉट सेलेक्शन और पारी की गति समझनी पड़ती है। शुरुआती मैचों में वैभव इसी संतुलन की तलाश में दिखे, लेकिन फाइनल में उन्होंने दिखा दिया कि वह सिर्फ पावर-हिटर नहीं, बल्कि दबाव में खुद को बदलने की क्षमता रखने वाले खिलाड़ी भी हैं।
15 साल की उम्र में 11 गेंदों की फिफ्टी और 29 गेंदों की 94 रन की पारी सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं है। यह भारतीय क्रिकेट के लिए एक संदेश है कि वैभव सूर्यवंशी अपनी राह खुद बना रहे हैं। वह परंपरागत बल्लेबाजी की सीमाओं में बंधकर नहीं खेलते, बल्कि खेल को अपनी शर्तों पर बदलने की क्षमता रखते हैं।
भारत A के लिए यह जीत खिताबी थी, लेकिन वैभव के लिए यह पारी उससे भी बड़ी थी। यह वापसी थी, जवाब था और भविष्य की घोषणा भी।
