अफगानिस्तान क्रिकेट के अग्रदूत तेज गेंदबाज शपूर जादरान नहीं रहे, भारत में चल रहा था इलाज

शपूर जादरान

अफगानिस्तान क्रिकेट के शुरुआती संघर्ष, सपनों और उभार से जुड़ा एक बड़ा नाम अब इतिहास का हिस्सा बन गया है। पूर्व अफगान तेज गेंदबाज शपूर जादरान का मंगलवार को भारत में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और भारत में उनका इलाज चल रहा था। जादरान अपने 39वें जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले दुनिया को अलविदा कह गए। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार वह भारत में इलाज करा रहे थे और Afghanistan Cricket Board ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने सोशल मीडिया पर शपूर जादरान को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि उन्होंने अफगानिस्तान क्रिकेट की सेवा सम्मान, साहस और गर्व के साथ की। बोर्ड ने कहा कि मैदान पर उनकी उपलब्धियां और योगदान अफगानिस्तान क्रिकेट के इतिहास का अहम हिस्सा रहेंगे।

शपूर जादरान सिर्फ एक तेज गेंदबाज नहीं थे। वह उस पीढ़ी के प्रतिनिधि थे, जिसने अफगानिस्तान क्रिकेट को छोटे मंचों से उठाकर विश्व क्रिकेट के नक्शे पर खड़ा किया। जब अफगानिस्तान क्रिकेट पहचान बना रहा था, जब टीम बड़े देशों के खिलाफ खुद को साबित करने की कोशिश कर रही थी, तब जादरान जैसे खिलाड़ियों ने अपनी रफ्तार, आक्रामकता और संघर्ष से इस सफर को दिशा दी।

बाएं हाथ के तेज गेंदबाज जादरान ने अफगानिस्तान के लिए ODI और T20I दोनों फॉर्मेट में प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने अफगानिस्तान के लिए 44 वनडे और 36 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। उनके करियर का सफर 2009 से 2020 तक फैला रहा।

जादरान उन खिलाड़ियों में शामिल थे जिन्होंने अफगानिस्तान को ICC टूर्नामेंट्स तक पहुंचाने और वहां पहचान दिलाने में भूमिका निभाई। वह उस दौर के चेहरे थे जब अफगानिस्तान क्रिकेट सिर्फ एक टीम नहीं, बल्कि युद्ध, विस्थापन और संघर्ष से निकले सपनों की कहानी बन चुका था। मैदान पर उनकी लंबी कद-काठी, बाएं हाथ की गेंदबाजी और आक्रामक अंदाज अफगान क्रिकेट प्रशंसकों की स्मृति में हमेशा रहेगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शपूर जादरान Hemophagocytic Lymphohistiocytosis यानी HLH नाम की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। यह प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी एक गंभीर स्थिति मानी जाती है, जिसमें शरीर में खतरनाक सूजन और कई अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, वह पिछले कुछ महीनों से दिल्ली-NCR क्षेत्र में इलाज करा रहे थे।

बताया गया कि पिछले साल अक्टूबर में वह पहली बार बीमार पड़े थे। अफगानिस्तान में डॉक्टरों ने उन्हें भारत जाकर इलाज कराने की सलाह दी थी। शुरुआती इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार भी हुआ और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी, लेकिन कुछ समय बाद बीमारी ने फिर से गंभीर रूप ले लिया।

शपूर जादरान के निधन ने अफगानिस्तान क्रिकेट समुदाय को गहरे शोक में डाल दिया है। ACB ने अपने संदेश में कहा कि मैदान से परे भी जादरान युवा अफगान क्रिकेटरों और दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों के लिए प्रेरणा थे। उनका जुझारूपन, दृढ़ता और खेल के प्रति प्रेम एक पूरी पीढ़ी को बड़े सपने देखने की हिम्मत देता रहा।

अफगानिस्तान क्रिकेट आज जिस मुकाम पर खड़ा है, उसकी नींव में कई अनसुने और संघर्षशील नाम हैं। शपूर जादरान उन्हीं नामों में से एक थे। उन्होंने उस दौर में अफगानिस्तान की जर्सी पहनी, जब जीत से ज्यादा जरूरी था दुनिया को यह बताना कि अफगानिस्तान क्रिकेट भी सपना देख सकता है, लड़ सकता है और आगे बढ़ सकता है।

शपूर जादरान अब मैदान पर नहीं उतरेंगे, लेकिन अफगानिस्तान क्रिकेट के इतिहास में उनका नाम उन खिलाड़ियों में दर्ज रहेगा जिन्होंने आने वाली पीढ़ी के लिए रास्ता बनाया। उनकी गेंदों की रफ्तार भले अब थम गई हो, लेकिन अफगान क्रिकेट के उदय की कहानी में उनका योगदान हमेशा जीवित रहेगा।

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