फुटबॉल की दुनिया में Paris Saint-Germain ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित कर दी है। बुडापेस्ट के Puskas Arena में खेले गए Champions League फाइनल में PSG ने Arsenal को पेनल्टी शूटआउट में हराकर लगातार दूसरी बार यूरोप की सबसे बड़ी क्लब ट्रॉफी अपने नाम कर ली।
120 मिनट तक चले रोमांचक मुकाबले में स्कोर 1-1 से बराबर रहा। इसके बाद मैच पेनल्टी शूटआउट में गया, जहां PSG ने Arsenal को 4-3 से हराया। Arsenal की तरफ से Eberechi Eze और Gabriel Magalhães पेनल्टी मिस कर गए, और इसी के साथ Arsenal का पहली बार Champions League जीतने का सपना फिर टूट गया।
Havertz ने Arsenal को दिलाई थी तेज शुरुआत
मैच की शुरुआत Arsenal के लिए शानदार रही। छठे मिनट में Kai Havertz ने गोल कर Arsenal को 1-0 की बढ़त दिला दी। इतने बड़े फाइनल में शुरुआती गोल ने Mikel Arteta की टीम को आत्मविश्वास दिया और Arsenal ने इसके बाद डिफेंसिव रणनीति अपनाते हुए मैच को कंट्रोल करने की कोशिश की।
Arsenal का प्लान साफ था; जल्दी बढ़त लो, PSG को गेंद रखने दो, लेकिन खतरनाक जगहों पर स्पेस मत दो। लंबे समय तक यह प्लान काम करता दिखा, लेकिन PSG ने धीरे-धीरे मैच पर अपना नियंत्रण मजबूत कर लिया।
Dembélé की पेनल्टी से लौटा PSG
दूसरे हाफ में PSG को बराबरी का मौका मिला और Ousmane Dembélé ने पेनल्टी पर गोल कर स्कोर 1-1 कर दिया। इसके बाद PSG ने लगातार Arsenal पर दबाव बनाया। आंकड़ों में भी PSG का दबदबा साफ दिखा। PSG ने मैच में 74% possession रखा और 21 shots लगाए, जबकि Arsenal सिर्फ 7 शॉट ही लगा सका।
Expected Goals यानी xG में भी PSG आगे रहा। PSG का xG 1.77 था, जबकि Arsenal का सिर्फ 0.44 रहा। PSG के गोलकीपर Matvey Safonov को पूरे मैच में सिर्फ एक ऑन-टारगेट शॉट का सामना करना पड़ा; वही Havertz का शुरुआती गोल था।
पेनल्टी में Arsenal की किस्मत ने साथ छोड़ा
एक्स्ट्रा टाइम में भी दोनों टीमें गोल नहीं कर सकीं और मुकाबला पेनल्टी शूटआउट में पहुंच गया। Arsenal के गोलकीपर David Raya ने Nuno Mendes की पेनल्टी बचाकर उम्मीद जगाई, लेकिन Eberechi Eze का शॉट बाहर चला गया और Gabriel Magalhães ने निर्णायक पेनल्टी क्रॉसबार के ऊपर मार दी।
PSG के खिलाड़ी शूटआउट में ज्यादा शांत और तैयार नजर आए। वहीं Arsenal को अपने कई नियमित पेनल्टी लेने वाले खिलाड़ियों की कमी महसूस हुई। Bukayo Saka, Kai Havertz, Martin Odegaard और Leandro Trossard जैसे खिलाड़ी तब तक मैदान से बाहर जा चुके थे।
Luis Enrique का तीसरा Champions League खिताब
इस जीत के साथ PSG के कोच Luis Enrique ने भी इतिहास रच दिया। यह उनका बतौर कोच तीसरा Champions League खिताब है। इससे पहले वह 2015 में Barcelona के साथ यह ट्रॉफी जीत चुके थे। अब Luis Enrique उन चुनिंदा कोचों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने तीन या उससे ज्यादा बार Champions League जीती है।
PSG ने पिछले साल Munich में Internazionale को 5-0 से हराकर अपनी पहली Champions League ट्रॉफी जीती थी। अब Arsenal को हराकर PSG ने लगातार दूसरी बार खिताब जीत लिया। 1992 में Champions League के नए फॉर्मेट के बाद Real Madrid के बाद PSG दूसरी टीम बनी है, जिसने अपना खिताब डिफेंड किया।
Vitinha और João Neves रहे PSG के असली इंजन
PSG की जीत में सिर्फ गोल या पेनल्टी ही नहीं, बल्कि मिडफील्ड का कंट्रोल भी बेहद अहम रहा। Vitinha पूरे मैच में PSG के खेल का केंद्र रहे। उन्होंने सबसे ज्यादा touches, passes और progressive carries के साथ Arsenal को लगातार दबाव में रखा।
वहीं João Neves ने भी शानदार प्रदर्शन किया। 21 साल के इस खिलाड़ी ने मैदान पर हर जगह अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उनके पासिंग, रिकवरी और ड्यूल्स जीतने की क्षमता ने PSG को मिडफील्ड में मजबूती दी।
Arsenal फिर करीब आकर चूक गया
Arsenal के लिए यह हार बेहद दर्दनाक रही। 20 साल बाद Champions League फाइनल खेलने उतरी टीम खिताब के बहुत करीब पहुंची, लेकिन आखिर में पेनल्टी शूटआउट ने उनका सपना तोड़ दिया। Arsenal ने इस सीजन Premier League जीती और यूरोप में भी शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन Champions League की ट्रॉफी अब भी उसके हाथ से दूर है।
Mikel Arteta की टीम ने फाइनल में डिफेंसिव अनुशासन तो दिखाया, लेकिन PSG जैसी टीम के खिलाफ सिर्फ बचाव के भरोसे जीतना आसान नहीं था। Arsenal को अब आगे यह सोचना होगा कि क्या बड़े मुकाबलों में उसे और ज्यादा आक्रामक फुटबॉल खेलने की जरूरत है।
PSG की यह जीत सिर्फ एक और Champions League ट्रॉफी नहीं है, बल्कि यूरोपीय फुटबॉल में उसकी नई सत्ता का ऐलान है। Neymar-Messi-Mbappe युग के बाद भी PSG ने साबित किया है कि यह टीम अब सिर्फ सितारों के भरोसे नहीं, बल्कि सिस्टम, मिडफील्ड कंट्रोल, मानसिक मजबूती और Luis Enrique की रणनीति के दम पर जीतती है।
दूसरी तरफ Arsenal के लिए यह हार दिल तोड़ने वाली जरूर है, लेकिन यह भी साफ है कि Arteta की टीम अब यूरोप की सबसे मजबूत टीमों में शामिल हो चुकी है। फर्क सिर्फ इतना रहा- PSG ने बड़े मंच पर बड़े मौके को पकड़ लिया, Arsenal ने उसे गंवा दिया।
