मनोज तिवारी का TMC से मोहभंग: टिकट के लिए 5 करोड़ की मांग का लगाया गंभीर आरोप

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के एक दिन बाद ही पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर और टीएमसी के निवर्तमान विधायक मनोज तिवारी ने मंगलवार को पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी। तिवारी ने पार्टी पर बेहद गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, जिसमें टिकट देने के बदले में भारी रिश्वत की मांग शामिल है।

टिकट के लिए मांगी गई 5 करोड़ की रिश्वत

मनोज तिवारी ने एक साक्षात्कार में दावा किया कि उन्हें हावड़ा की शिवपुर सीट से चुनाव लड़ने के लिए टिकट देने से इसलिए मना कर दिया गया क्योंकि उन्होंने 5 करोड़ रुपये की रिश्वत देने से इनकार कर दिया था। तिवारी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस में अब योग्यता नहीं, बल्कि पैसा टिकट तय करता है। तिवारी ने कहा, “इस हार से मैं बिल्कुल भी हैरान नहीं हूं। जब पूरी पार्टी भ्रष्टाचार में लिप्त हो और किसी भी क्षेत्र में कोई विकास न हुआ हो, तो ऐसा होना ही था।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि इस बार करीब 70-72 उम्मीदवारों ने टिकट पाने के लिए 5-5 करोड़ रुपये चुकाए थे। तिवारी ने चुनौती दी कि जिन लोगों ने पैसे देकर टिकट खरीदे, उनके जीतने का रिकॉर्ड चेक कर लिया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया, “जहां तक टीएमसी का सवाल है, मेरे लिए वह अध्याय अब खत्म हो चुका है।”

राजनीति में आने का अनुभव और मोहभंग

मनोज तिवारी ने खुलासा किया कि राजनीति में आने की उनकी कोई शुरुआती इच्छा नहीं थी। 2019 में ममता बनर्जी द्वारा लोकसभा टिकट की पेशकश को उन्होंने क्रिकेट में व्यस्त होने के कारण विनम्रता से ठुकरा दिया था। हालांकि, 2021 में ‘दीदी’ के बुलावे पर उन्होंने शिवपुर से चुनाव लड़ने का फैसला किया। विधायक बनने के बाद उनका अनुभव काफी निराशाजनक रहा। उन्होंने बताया कि ‘राज्य खेल मंत्री’ (MoS) का पद केवल एक ‘लॉलीपॉप’ जैसा था, जिसकी कोई वास्तविक शक्ति नहीं थी। तिवारी ने कहा, “मैंने ऐसी बैठकें देखी हैं जहां सभी मंत्रियों को बुलाया जाता था, लेकिन अगर मैं किसी समस्या की ओर ध्यान दिलाना चाहता था, तो मुख्यमंत्री बीच में ही रोक देती थीं कि ‘मेरे पास तुम्हारे लिए समय नहीं है’।”

खेल विभाग में विकास का अभाव

तिवारी ने आरोप लगाया कि उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र के बुनियादी काम कराने के लिए भी भारी संघर्ष करना पड़ा। हावड़ा जिले की जल निकासी (sewage/drainage) व्यवस्था को ठीक कराने की उनकी लगातार कोशिशें नाकाम रहीं, क्योंकि स्थानीय नगर पालिका पर काबिज टीएमसी वफादारों ने कभी काम नहीं होने दिया। उन्होंने सीएम की घोषणाओं को केवल ‘जुबानी जमा-खर्च’ करार दिया।

वसूली के आरोपों पर दी सफाई

तिवारी पर अपने कार्यकाल के दौरान बिल्डरों से वसूली करने के आरोप भी लगे, जिसका उन्होंने मजाक उड़ाते हुए खंडन किया। उन्होंने कहा, “2021 के चुनाव शपथ पत्र में मैंने खुद घोषित किया था कि मेरे पास 20 करोड़ रुपये नकद हैं। मैंने 10 साल आईपीएल और 20 साल प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला है, मुझे वसूली के पैसों की जरूरत नहीं है।” उन्होंने इन आरोपों को कुछ स्थानीय पार्षदों द्वारा रची गई साजिश बताया।

मंत्री अरूप विश्वास के साथ मतभेद

तिवारी ने राज्य के खेल मंत्री अरूप विश्वास पर निशाना साधते हुए कहा कि वे पेशेवर ईर्ष्या के कारण उन्हें काम नहीं करने देते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अरूप विश्वास को खेल की बुनियादी समझ भी नहीं है और उन्होंने उन्हें मंच तक साझा करने से रोका।

भविष्य की योजनाएं: कोचिंग में वापसी

राजनीति से मोहभंग होने के बाद मनोज तिवारी अब अपनी पहली पसंद, क्रिकेट की ओर वापस लौटना चाहते हैं। तिवारी ने BCCI लेवल-2 कोचिंग परीक्षा ‘डिस्टिंक्शन’ के साथ पास की है और अब वे पेशेवर कोच के रूप में अपना करियर शुरू करना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होने में रुचि नहीं रखते।

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