25 लाख महीना खर्च कर सिर्फ एशिया जीतना है? पीआर श्रीजेश ने भारतीय हॉकी को दिखाया आईना

PR Sreejesh

भारतीय हॉकी टीम के पूर्व गोलकीपर और दिग्गज खिलाड़ी पीआर श्रीजेश ने भारतीय हॉकी की मौजूदा स्थिति पर तीखा सवाल उठाया है। श्रीजेश ने साफ कहा है कि वह भारतीय हॉकी के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि निराश इसलिए हैं क्योंकि उन्हें इस खेल की परवाह है।

श्रीजेश ने सोशल मीडिया पर लिखे अपने पोस्ट में भारतीय टीम के हालिया प्रदर्शन, FIH Pro League की स्थिति और विदेशी चीफ कोच पर हो रहे भारी खर्च को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। उनके मुताबिक, एशियाई टूर्नामेंट जीतना अच्छी बात है, लेकिन भारतीय हॉकी का असली पैमाना अब एशिया नहीं, बल्कि दुनिया की शीर्ष टीमें होनी चाहिए।

“मैं भारतीय हॉकी के खिलाफ नहीं हूं, मुझे फर्क पड़ता है”

पीआर श्रीजेश ने अपने पोस्ट की शुरुआत में लिखा कि वह भारतीय हॉकी के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनकी निराशा इसलिए है क्योंकि वह भारतीय हॉकी की परवाह करते हैं।

श्रीजेश ने माना कि उनकी हॉकी समझ सीमित हो सकती है और यह सिर्फ उनकी राय है, लेकिन इसके बाद उन्होंने भारतीय हॉकी की मौजूदा दिशा पर बेहद स्पष्ट सवाल उठाए।

FIH Pro League में 8वां स्थान चिंता का विषय

श्रीजेश ने पिछले दो FIH Pro League सीजन का हवाला देते हुए कहा कि इन दोनों सीजन ने भारतीय हॉकी की असल स्थिति सामने रख दी है। भारत का आठवें स्थान पर रहना यह दिखाता है कि दुनिया की मजबूत टीमों के खिलाफ भारतीय टीम अभी लगातार प्रभावी प्रदर्शन नहीं कर पा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर आयरलैंड और पाकिस्तान जैसी टीमों की मौजूदगी न होती, तो अंक तालिका की तस्वीर भारत के लिए और खराब दिख सकती थी।

एशियाई जीत अब वैश्विक पैमाना नहीं: श्रीजेश

भारत ने हाल के समय में Asian Champions Trophy और Asia Cup जैसे टूर्नामेंट जीते हैं। श्रीजेश ने इसके लिए टीम को बधाई दी, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि ईमानदारी से देखा जाए तो ये टूर्नामेंट अब भारतीय हॉकी की वैश्विक स्थिति तय करने का सही पैमाना नहीं हैं।

उनका कहना है कि भारत और बाकी एशियाई टीमों के बीच अब बड़ा अंतर है। अगर भारत की जूनियर टीम पाकिस्तान को हरा सकती है, तो यह भी दिखाता है कि एशिया में भारत की स्थिति मजबूत है। लेकिन असली चुनौती दुनिया की शीर्ष टीमों के खिलाफ लगातार प्रतिस्पर्धा करना है।

विदेशी कोच पर 25 लाख महीना खर्च क्यों?

श्रीजेश ने अपने पोस्ट में सबसे बड़ा सवाल विदेशी चीफ कोच पर हो रहे खर्च को लेकर उठाया। उन्होंने लिखा कि क्या भारत हर महीने लगभग 24,286 यूरो, यानी करीब 25 लाख रुपये, सिर्फ एशियाई टूर्नामेंट जीतने के लिए खर्च कर रहा है?

उन्होंने पूछा कि क्या यह निवेश केवल एशिया में दबदबा बनाने के लिए है या भारत को World Cup, Pro League और Olympics में वास्तविक medal contender बनाने के लिए?

श्रीजेश का यह सवाल भारतीय हॉकी प्रशासन और टीम मैनेजमेंट के लिए बड़ा संदेश माना जा रहा है।

“सपोर्ट का मतलब चुप रहना नहीं”

पीआर श्रीजेश ने यह भी कहा कि टीम का समर्थन करने का मतलब यह नहीं है कि कठिन सवाल नहीं पूछे जाएं। उनके मुताबिक, असली समर्थक वही होते हैं जो ऊंचे मानक चाहते हैं और टीम से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रखते हैं।

उन्होंने साफ कहा कि क्षेत्रीय सफलता से संतुष्ट हो जाना भारतीय हॉकी का मानक नहीं होना चाहिए, खासकर तब जब टीम दुनिया की शीर्ष टीमों के खिलाफ संघर्ष कर रही हो।

भारतीय हॉकी के लिए चेतावनी या जरूरी सवाल?

श्रीजेश का बयान केवल आलोचना नहीं, बल्कि भारतीय हॉकी के लिए एक चेतावनी की तरह देखा जा सकता है। वह खुद उस पीढ़ी का हिस्सा रहे हैं जिसने भारतीय हॉकी को ओलंपिक पदक की राह पर वापस लाने में अहम भूमिका निभाई।

ऐसे में जब पीआर श्रीजेश जैसा दिग्गज खिलाड़ी भारतीय हॉकी के स्तर, लक्ष्य और खर्च पर सवाल उठाता है, तो इसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।

भारतीय हॉकी के सामने अब सवाल साफ है कि क्या टीम सिर्फ एशिया में जीतकर संतुष्ट रहेगी या World Cup, Pro League और Olympics में दुनिया की elite teams के खिलाफ लगातार medal contender बनने की तैयारी करेगी?

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