टी20 क्रिकेट आज दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट बिजनेस मॉडल बन चुका है। IPL से लेकर T20 World Cup तक, हर खिलाड़ी इस फॉर्मेट में अपनी जगह बनाना चाहता है। लेकिन 2007 में कहानी बिल्कुल अलग थी। पूर्व IPL चेयरमैन ललित मोदी ने अब दावा किया है कि जब पहला ICC T20 World Cup खेला जाना था, तब भारत के कई बड़े खिलाड़ी इस टूर्नामेंट को खेलने के लिए तैयार नहीं थे।
ललित मोदी ने ANI से बातचीत में कहा कि 2007 में भारत के इंग्लैंड दौरे के दौरान उन्होंने खुद खिलाड़ियों से T20 World Cup खेलने की अपील की थी। उनके मुताबिक, कई खिलाड़ी लंबे दौरे के बाद घर लौटना चाहते थे और नए फॉर्मेट को लेकर उत्साहित नहीं थे।
मोदी ने दावा किया कि उन्होंने इंग्लैंड में भारतीय ड्रेसिंग रूम में जाकर खिलाड़ियों से कहा कि वे T20 World Cup खेलें, लेकिन जवाब मिला कि यह कौन-सा नया खेल है और वे इसे खेलने के इच्छुक नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय T20 क्रिकेट को लेकर खिलाड़ियों, ब्रॉडकास्टर्स और विज्ञापन बाजार में वैसी गंभीरता नहीं थी जैसी आज देखने को मिलती है।
सीनियर नहीं, Dhoni की युवा टीम गई थी South Africa
2007 में भारत ने इंग्लैंड का लंबा दौरा किया था। यह दौरा 19 जुलाई से 8 सितंबर तक चला, जिसमें तीन टेस्ट और सात वनडे मैच खेले गए। इसके तुरंत बाद 11 सितंबर से South Africa में पहला ICC World Twenty20 शुरू हुआ। उस इंग्लैंड दौरे पर राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली जैसे सीनियर खिलाड़ी मौजूद थे, लेकिन वे T20 World Cup squad का हिस्सा नहीं बने।
भारत ने उस टूर्नामेंट में MS Dhoni की कप्तानी में युवा टीम भेजी। टीम में Virender Sehwag, Yuvraj Singh, Gautam Gambhir, Dinesh Karthik, RP Singh और Irfan Pathan जैसे खिलाड़ी शामिल थे। ललित मोदी के मुताबिक, उस समय BCCI ने अपनी मुख्य टीम नहीं भेजी, बल्कि एक “raw and green” टीम को South Africa भेजा।
मोदी ने सवाल उठाया कि क्या आज किसी World Cup में भारत ऐसी टीम भेजे तो जनता, बोर्ड या खिलाड़ी इसे स्वीकार करेंगे? उनके अनुसार, आज कोई भी खिलाड़ी World Cup से बाहर रहे तो भारी प्रतिक्रिया होगी, लेकिन 2007 में T20 format को लेकर विश्वास ही नहीं था।
Yuvraj के 6 छक्कों ने बदली तस्वीर
ललित मोदी ने यह भी कहा कि 2007 T20 World Cup को असली चर्चा तब मिली जब Yuvraj Singh ने England के Stuart Broad के एक ओवर में छह छक्के लगाए। 19 सितंबर 2007 को Durban में खेले गए मुकाबले में Yuvraj ने सिर्फ 12 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया और यह पारी T20 इतिहास की सबसे iconic पारियों में शामिल हो गई।
मोदी के मुताबिक, उससे पहले टूर्नामेंट की ratings बहुत मजबूत नहीं थीं, लेकिन Yuvraj के छह छक्कों ने लोगों का ध्यान खींचा। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने खिलाड़ियों के लिए Porsche car का इनाम घोषित किया था; जो भी एक ओवर में छह छक्के लगाएगा या छह विकेट लेगा, उसे कार मिलेगी। बाद में Yuvraj Singh ने वह कार जीती।
वही टीम बनी World Champion
दिलचस्प बात यह है कि जिस टीम को उस समय “युवा” और “अनुभवहीन” माना जा रहा था, उसी टीम ने इतिहास रच दिया। MS Dhoni की कप्तानी में भारत ने 24 सितंबर 2007 को Johannesburg में Pakistan को फाइनल में 5 रन से हराकर पहला ICC T20 World Cup जीत लिया।
यह जीत सिर्फ एक trophy नहीं थी। इसने भारतीय क्रिकेट की दिशा बदल दी। 2007 T20 World Cup की जीत के बाद भारत में T20 cricket को नई पहचान मिली और उसके बाद IPL का रास्ता और मजबूत हुआ। आज जिस T20 फॉर्मेट में अरबों रुपये का broadcast market, franchise leagues और global fanbase है, उसकी भारतीय शुरुआत कहीं न कहीं उसी 2007 की जीत से जुड़ती है।
The Khel Mantra Take
ललित मोदी का दावा 2007 के उस दौर को फिर से चर्चा में लाता है, जब T20 क्रिकेट को serious format नहीं माना जाता था। लेकिन cricket की यही खूबसूरती है; कभी जिसे “stupid game” समझा गया, वही आज क्रिकेट की सबसे बड़ी commercial और entertainment force बन चुका है।
MS Dhoni की युवा टीम, Yuvraj Singh के छह छक्के और भारत की ऐतिहासिक जीत—इन तीनों ने मिलकर T20 क्रिकेट की किस्मत बदल दी। आज अगर IPL दुनिया की सबसे बड़ी cricket league है, तो उसकी कहानी की शुरुआत 2007 World Cup की उसी रात से मानी जा सकती है।
