नीरज चोपड़ा की चांदी ‘निराश’ करती है, सिल्वर जीतने के बाद खुद बताई अपनी सबसे बड़ी परेशानी

नीरज चोपड़ा

भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीता, लेकिन यह पदक भारतीय फैंस को पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाया। क्योंकि, नीरज ने अपने करियर में ऐसा स्तर बना दिया है, जहां उनसे सिर्फ मेडल नहीं, बल्कि गोल्ड और दबदबे की उम्मीद की जाती है।

ग्लासगो में हुए जैवलिन थ्रो फाइनल में नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो किया और दूसरे स्थान पर रहे। गोल्ड मेडल श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिराज ने 89.75 मीटर के थ्रो के साथ अपने नाम किया। वहीं भारतीय यशवीर सिंह ने ब्रॉन्ज मेडल जीत सभी को हैरान कर दिया।

सिल्वर के बाद भी क्यों उठ रहे सवाल?

किसी भी भारतीय एथलीट के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स का सिल्वर मेडल बड़ी उपलब्धि होती, लेकिन नीरज चोपड़ा के मामले में कहानी अलग है। नीरज ओलंपिक, वर्ल्ड चैंपियनशिप और बड़े मंचों पर लगातार भारत को गौरव दिला चुके हैं। ऐसे में जब वह गोल्ड से चूकते हैं, तो सवाल सिर्फ मेडल का नहीं, बल्कि उनकी फिटनेस, लय और फॉर्म का भी हो जाता है।

नीरज ने मैच के बाद खुद स्वीकार किया कि वह अभी अपनी सर्वश्रेष्ठ फिटनेस और सर्वश्रेष्ठ फॉर्म से दूर हैं। उन्होंने कहा कि चोट से वापसी के बाद वह धीरे-धीरे पुराने स्तर तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

नीरज ने कहा, “मैं यह नहीं कह सकता कि मेरी फिटनेस पहले जैसी हो गई है। मैं धीरे-धीरे उस स्तर तक पहुंच रहा हूं। चोट के बाद दोहा मेरा पहला मुकाबला था। यहां मैं थोड़ा बेहतर था, लेकिन आने वाले मुकाबलों के जरिए अपनी फॉर्म वापस पाने की कोशिश कर रहा हूं।”

चोट के बाद सावधानी से खेल रहे हैं नीरज

नीरज चोपड़ा ने बताया कि चोट से वापसी के बाद खिलाड़ी को हर कदम पर सावधानी रखनी पड़ती है। उनके मुताबिक जब कोई एथलीट 100 प्रतिशत फिट होता है, तो उसका आत्मविश्वास और लड़ने का जज्बा अलग होता है, लेकिन चोट के बाद वापसी में शरीर और तकनीक दोनों का ध्यान रखना पड़ता है।

उन्होंने कहा, “जब आप 100 प्रतिशत फिट होते हैं, तो आपको लगता है कि आप कुछ भी कर सकते हैं। लेकिन चोट से उबरकर वापसी करते समय हर कदम पर सावधान रहना पड़ता है।”

यही वजह रही कि ग्लासगो में नीरज पूरे आक्रामक अंदाज में नहीं दिखे। उन्होंने खुद माना कि कभी वह पूरी ताकत से थ्रो करना चाहते थे, तो कभी हालात को देखते हुए कंट्रोल में रहना पड़ रहा था।

ठंडा मौसम भी बना चुनौती

नीरज चोपड़ा ने ग्लासगो के मौसम को भी मुश्किल बताया। उन्होंने कहा कि ठंड में वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पाते। अपने 85.83 मीटर के थ्रो को लेकर नीरज ने कहा कि उनका सिर्फ एक थ्रो अच्छा रहा, बाकी प्रयासों में जैवलिन सही दिशा में नहीं जा पाया।

नीरज ने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें गर्म मौसम पसंद है, क्योंकि उनकी रगों में भारतीय खून दौड़ता है।

एक सही थ्रो ने बदल दिया नतीजा

जैवलिन थ्रो में कई बार एक सही प्रयास पूरे मुकाबले का परिणाम बदल देता है। ग्लासगो में भी यही हुआ। श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिराज का 89.75 मीटर का एक बड़ा थ्रो उन्हें गोल्ड दिला गया, जबकि नीरज का 85.83 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास सिल्वर तक सीमित रह गया।

नीरज ने भी माना कि इस खेल में एक अच्छा थ्रो काफी होता है। उन्होंने कहा कि आज रुमेश का एक थ्रो अच्छा था और उनका भी सिर्फ एक ही थ्रो ठीक रहा।

नीरज की चांदी निराश क्यों करती है?

नीरज चोपड़ा का सिल्वर इसलिए निराश करता है, क्योंकि भारतीय फैंस अब उनसे गोल्ड की उम्मीद करने लगे हैं। यह नीरज की असफलता नहीं, बल्कि उनके बनाए हुए विशाल मानक का परिणाम है। वह अभी भी पोडियम पर हैं, लेकिन अपनी peak form में नहीं।

नीरज ने साफ कहा कि अभी सुधार की काफी गुंजाइश है और उनका लक्ष्य आने वाली प्रतियोगिताओं में धीरे-धीरे बेहतर प्रदर्शन करना है।

आगे क्या?

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का सिल्वर नीरज चोपड़ा के लिए अंत नहीं, बल्कि चोट के बाद वापसी की प्रक्रिया का हिस्सा है। अच्छी बात यह है कि नीरज खुद अपनी कमियों को पहचान रहे हैं और उन्हें सुधारने की बात कर रहे हैं।

फैंस के लिए राहत की बात यह है कि नीरज अभी भी पदक जीत रहे हैं। चिंता की बात यह है कि वह अभी अपनी सर्वश्रेष्ठ लय में नहीं हैं।

जब नीरज पूरी फिटनेस, पूरी rhythm और पूरे confidence के साथ लौटेंगे, तब भारत फिर 90 मीटर और गोल्ड की उम्मीद कर सकता है।

Share this Article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *