श्रीलंकाई क्रिकेट (SLC) में पिछले काफी समय से चल रहा विवाद अब अपने चरम पर पहुंच गया है। बुधवार को श्रीलंका सरकार ने देश के क्रिकेट बोर्ड का प्रशासन पूरी तरह से अपने कब्जे में लेने का ऐतिहासिक फैसला किया है। यह कदम बोर्ड के अध्यक्ष शाम्मी सिल्वा और उनकी पूरी कार्यकारी समिति के सामूहिक इस्तीफे के बाद उठाया गया है।
राष्ट्रपति के दखल के बाद हुआ ‘शांतिपूर्ण एग्जिट’
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनूरा कुमारा दिसानायके की मध्यस्थता के बाद शाम्मी सिल्वा और अन्य पदाधिकारियों ने मंगलवार को अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। बोर्ड पर वित्तीय अनियमितताओं (Financial Irregularities) और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे थे। खेल मंत्री सुनील कुमारा गमागे ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि खेल कानून संख्या 25 (1973) के तहत अब श्रीलंका क्रिकेट का सारा प्रशासनिक काम अस्थायी रूप से ‘युवा मामले और खेल मंत्रालय’ के अधीन रहेगा।
क्यों गिरी शाम्मी सिल्वा पर गाज?
खराब प्रदर्शन: पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय मंच पर श्रीलंका की राष्ट्रीय टीम का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है, जिससे फैंस और सरकार दोनों नाराज थे।
भ्रष्टाचार के आरोप: खिलाड़ियों और अन्य स्टेकहोल्डर्स की ओर से बोर्ड के कामकाज में गड़बड़ी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं।
लंबा कार्यकाल: शाम्मी सिल्वा 2019 से लगातार 7 वर्षों तक बोर्ड के अध्यक्ष रहे। वे 2021, 2023 और 2025 में निर्विरोध चुने गए थे।
आगे क्या? अंतरिम समिति संभालेगी जिम्मा
खेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जल्द ही एक अंतरिम समिति (Interim Committee) नियुक्त की जाएगी। यह समिति न केवल बोर्ड के मौजूदा संकट का समाधान निकालेगी, बल्कि श्रीलंकाई क्रिकेट में बड़े ‘स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स’ (ढांचागत सुधार) भी लागू करेगी। बता दें कि शाम्मी सिल्वा हाल ही में जय शाह के बाद एशियाई क्रिकेट परिषद (ACC) के अध्यक्ष भी बने थे, ऐसे में उनके इस्तीफे का असर एशियाई क्रिकेट की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
