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14वीं बार टॉस हारा भारत, इंग्लैंड ने चुना वो रास्ता जिस पर कभी नहीं मिली जीत!

भारत ने लगातार 14वीं बार अंतरराष्ट्रीय टॉस गंवा दिया है, वहीं इंग्लैंड ने मैनचेस्टर में टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी चुनी।लेकिन इस मैदान पर आज तक कोई भी टीम पहले गेंदबाज़ी करके टेस्ट नहीं जीत सकी है। क्या इतिहास फिर खुद को दोहराएगा?

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मैनचेस्टर में खेले जा रहे इंग्लैंड बनाम भारत चौथे टेस्ट मैच में एक बार फिर इतिहास दोहराया गया, लेकिन इस बार मैदान पर नहीं,कारनामा देखने को मिला है टॉस में। मैनचेस्टर के साथ भारत ने लगातार 14वीं बार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में टॉस गंवा दिया है। ये वही टीम है जो खेल के मैदान पर कितनी भी बड़ी चुनौती का सामना कर सकती है, लेकिन सिक्के की किस्मत उससे रूठी हुई है।

इससे पहले भारत ने आखिरी बार टॉस जनवरी 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ राजकोट में T20I में जीता था। तब से अब तक टीम इंडिया तीनों फॉर्मेट—टेस्ट, वनडे और टी20 में लगातार 14 बार टॉस हार चुकी है। आश्चर्यजनक बात यह है कि 14 बार टॉस हारने की संभावना मात्र 1/16,384 होती है। यानी इतनी बार लगातार टॉस हारना किसी चमत्कार से कम नहीं, इसे कहते हैं दुर्भाग्यपूर्ण चमत्कार!

अब बात करें इंग्लैंड की धरती पर टेस्ट में टॉस जीतने की, तो आंकड़े और भी हैरान करते हैं। पिछले 10 वर्षों में इंग्लैंड में टॉस जीतने वाले अकेले कप्तान विराट कोहली हैं, 2018 में विराट कोहली ने टॉस जीता था।

इस टॉस-संकट का असर सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है। इंग्लैंड की कंडीशंस में टॉस हारना अक्सर मैच का रुख तय कर देता है। खासकर जब पिच और मौसम मिलकर गेंदबाज़ों को मदद दे रहे हों। हालांकि इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी करने का फैसला किया, लेकिन इस मैदान पर अब तक कोई भी टीम पहले गेंदबाज़ी चुनकर टेस्ट मैच नहीं जीत पाई है।

क्या ये सिर्फ इत्तेफाक है, या किस्मत वाकई टीम इंडिया से नाराज़ है? जहां एक तरफ टीम के प्रदर्शन पर फोकस होना चाहिए, वहीं बार-बार टॉस हारना रणनीति और मानसिकता दोनों को प्रभावित करता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि मैनचेस्टर से आगे जाकर भारत न सिर्फ मैच जीते, बल्कि सिक्के की बाज़ी भी पलटे।

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